यूँ कभी तबाही का जश्न मना लेते हैं,,, अपनी पलकों पे सितारों को सजा लेते हैं,,, तुम तो अपने थे ज़रा हाथ बढाया होता,,, गैर भी डूबने वाले को बचा लेते हैं...
दिल मैं तम्मनाओं को दबाना सीख लिया,,, गम को आँखों मैं छुपाना सीख लिया,,, मेरे चहरे से कोई बात ज़ाहिर न हो,,, इसीलिए दबा के होठों को मुस्कुराना सीख लिया...
यूँ कभी तबाही का जश्न मना लेते हैं,,, अपनी पलकों पे सितारों को सजा लेते हैं,,, तुम तो अपने थे ज़रा हाथ बढाया होता,,, गैर भी डूबने वाले को बचा लेते हैं...