तो कफ़न मेरे चहेरे से हटाया क्यूँ था

जाना था दूर तो पास बुलाया क्यूँ था 
प्यार था हमसे टू बहलाया क्यूँ था 
खुश थे हम अपनी गम ज़िन्दगी मैं 
चेहरा अपना दिखा कर तद्पाया क्यूँ था 
अगर वहशत थी सूरत से हमारी ही इतनी 
तो कफ़न मेरे चहेरे से हटाया क्यूँ था

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